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इंदिरापुरम का यह विशाल पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर अतिशयों से युक्त है ! इसका पंचकल्याणक महोत्सव नवम्बर २०१७ में आचार्य श्री १०८ विरागसागरजी महाराज एवं राष्टृसंत मुनि श्री १०८ विहर्षसागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में संपन्न हुआ है ! तीन मंजिला इमारत के प्रथम तल में मूलवेदी श्री १००८ पार्श्वनाथ भगवान (७ फुट, ७ इंच ) के साथ साथ दो और वेदियां श्री १००८ चंदप्रभ भगवान एवं श्री १००८ शांतिनाथ भगवान शोभायमान है !  नितप्रतिदिन पूजा अर्चना एवं संतो के आगमन से ये मंदिर जैन धर्म की प्रभावना का अहम स्रोत है ! 

 

जैन समाज  इंदिरापुरम के सदस्यों के लंबे एवं अथक प्रयासों से, इंदिरापुरम में समाज का  गठन किया गया एवं अप्रैल २०१४ में महावीर जयंती मनाने हेतु राष्ट्रसंत मुनि श्री १०८ विहर्षसागर जी महाराज को ससंघ  आमंत्रित किया गया ! यह वो पल था , जिसने न केवल समाज़ निर्माण मैं अहम भूमिका निभाई बल्कि, मुनिश्री के आशीर्वांद एवं सानिद्य में प्रथम महावीर रथ महोत्सव मनाया गया ! तत्पचात  मुनिश्री की प्रेरणा से मंदिर निर्माण हेतु ३५४ वर्ग मीटर जमीन बुक की गई ! जमीन का मूल्य  ज्यादा होने के कारण, जैन समाज इंदिरापुरम एवं आसपास की समाजों के अथक प्रयासों एवं मदद से मंदिरजी का पंजीयन  सुनिश्चित किया गया ! मुनिश्री ससंघ ना केवल प्रेरणासूत्र थे बल्कि उन्होंने बिना मंदिर के चातुर्मास कर समाज में नयी ऊर्जा का प्रवाह किया जिसने मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाई ! मुनिश्री के आशीर्वाद, सानिध्य एवं सलाह के निरंतर प्रवाह से ही जैन मंदिर इंदिरापुरम का निर्माण संभव हो पाया है ! हम सभी इंदिरापुरमवासी मुनिश्री ससंघ  एवं उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करते है जिन्होने कठिन परिस्थितियों में मंदिर निर्माण में सहयोग दिया है !

 

मंदिर के निर्माण एवं रखरखाव के लिए श्रवण श्री १००८ पार्श्वनाथ दिगंबर जैन सभा, इंदिरापुरम  (पंजीकृत ) का गठन किया गया जो मंदिर निर्माण एवं दिन-प्रतिदिन के कार्यों के अलावा समाज की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है ! प्रतिवर्ष समिति द्वारा विभिन्न पर्वों का उत्साह पूर्वक आयोजन किया जा रहा है ! साथ ही जैन साधुओ के मंगल आगमन एवं विहार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है ! कम समय में, मंदिरजी में कई सारे धार्मिक कार्यों का सफलता पूर्वक आयोजन, समिति की एकजुटता एवं कठिन परिश्रम का परिणाम है !